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Vishnu Sharan Rastogi, who had to flee Sambhal due to 1978 riots where his shop was burnt down, revisited the temple near his former home in Khaggu Sarai, talks about abandoning his house, highlighting how Hindus are forced to leave their homes and businesses because of fear of communal violence.
Sources: - Another Hindu resident Vishnu Sharan Rastogi, patron of the city’s Hindu Sabha, said that though they did sell their house in Khaggu Sarai following the 1978 riots, they were never stopped by the Muslims living in the area from visiting the temple. >https://m.thewire.in/article/religion/sambhal-officials-revived-dormant-temple-in-muslim-area-hindu-locals-refute-encroachment-theory - 82 वर्षीय विष्णु शरण रस्तोगी का पुश्तैनी मकान 1978 तक नगर के खग्गू सराय में हुआ करता था। सभी 40 परिवार रस्तोगी थे। जोविष्णु शरण रस्तोगी के परिवार के थे। इसी परिवार का शिवमंदिर है जो अब 46 वर्ष बाद खुला है। विष्णु शरण रस्तोगी ने बताया कि 1978 में अचानक से दंगा हुआ था। इसमें कई हिंदू समाज के लोगों की जान गई थी। इससे उन इलाकों में ज्यादा भय था जहां हिंदू आबादी कम थी और मुस्लिम आबादी ज्यादा थी। इसमें खग्गू सराय भी ऐसा ही इलाका था जहां हिंदू 40 परिवार थे और मुस्लिम बड़ी संख्या में थे। इसलिए हिंदू परिवारों ने पलायन करना ही सही निर्णय माना। इसलिए मोहल्ला ठेर, कोटपूर्वी जैसे हिंदू आबादी वाले इलाके में जाकर बस गए। जब हिंदू परिवार नहीं रहे तो मंदिर पर ताला लगाना पड़ा था। >https://www.amarujala.com/amp/uttar-pradesh/sambhal/the-family-was-frightened-by-the-riots-of-1978-hence-left-the-locality-vishnu-sharan-rastogi-sambhal-news-c-275-1-smbd1030-117421-2024-12-161
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